शरीर में सूजन का घरेलु उपचार ,Gathiya bai, Home Remedies

       शरीर में सूजन का घरेलु उपचार 


शरीर में सूजन होने का एकमात्र कारण है निठल्लापन| यदि शरीर में सूजन उत्पन्न होते ही 
उचित ही उचित आहारविहार पर ध्यान दिया जाए तो इस रोग से शीघ्र ही छुटकारा पाया जा सकता है| इस रोग के बढ़ जाने पर कई अन्य रोग पनप सकते हैं| अत: इस बारे में विशेष ध्यान देने की :आवश्यकता होती है| कुछ लोग शारीरिक कार्य नाममात्र को करते हैं, अत: जब उनके कुछ अंग :निष्क्रियता की परिधि में आ जाते हैं तो वे सूज जाते हैं| शरीर में खून की कमी, पेट सम्बंधी विकार, जिक्र की खराबी आदि कारणों से भी प्राय: शरीर सूज जाता है | सूजन शरीर के जिस हिससे में होती है वो जगह पिलपिला सी हो जाती है और हाथ से दबाने पर एक गड्डा सा बनने लगता है। सूजन के मुख्य लक्षण में रोगी की त्वचा शुष्क हो जाती हैए कमजोरी, प्यास अधिक लगनाए बुखार आदि का होना है। सूजन कोई अपने आप में बीमारी नहीं है। किसी दूसरी बीमारी की वजह से भी शरीर में सूजन हो सकती है। दिल की बीमारी में सूजन जांघों और हाथों पर होती है। लीवर की समस्या में सूजन पेट पर होती है। गुर्दे की बीमारी में सूजन चेहरे पर होती है। इसके अलावा महिलाओं के मासिक धर्म की समस्या में मुंहए हाथ और पैरों पर सूजन होती है।
शरीर में सूजन की पहचान :-
शरीर में सूजन आने के कारण त्वचा पर लाल-लाल मांस उभर आता है| उसमें दर्द होता है
शरीर में खुजली होना
कई बार मांस फूलकर छिल जाना
 बेचैनी बढ़ जाती है|
रोगी के प्राण सूजन वाले स्थान पर अटके रहते हैं|
शरीर में सूजन के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं :-

मुल्तानी मिट्टी :- मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल भारतीय महिलाएं सदियों से करती आ रही हैं। यह हम भारतीयों के लिए कोई नई बात नहीं हैं। मुल्तानी मिट्टी पीढियों से हमारे चेहरे के लिए मददगार उपचार साबित हुआ है। यह पैक लगभग हर तरह की त्वचा के लिए मददगार होता हैं। मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी कर सकते हैं। यह सभी तरह की त्वचा से जुड़ी परेशानियों से निजात दिलाता हैं शरीर पर सूजन आ जाने पर मुल्तानी मिट्टी पानी में घोलकर शरीर पर लगानी चाहिए इससे सूजन में बहुत आराम मिलता है

तरबूज के बीज :- तरबूज हमारे पसंदीदा फलों में से एक है. इस फल को हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक माना जाता है. तरबूज सर्दी के मौसम में नहीं बल्कि गर्मी के मौसम में होने वाला फल है. यह फल अन्य फलों से सस्ता है इसलिए इस फल को किसी भी वर्ग के व्यक्ति आसानी खरीद सकते है.तरबूज की खेती भारत के सभी स्थानों पर की जाती है. इस फल की खेती नदियों के किनारे तथा रेतीली मिटटी में ही हो सकती है.तरबूज काफी बड़ा और भारी फल होता है. इसका रंग ऊपर से हरा होता है तथा अंदर से लाल होता है. इसके बीज लाल व काले रंग के पाए जाते हैं. तरबूज रस से भरा हुआ होता है. यह फल खाने में अत्यंत मीठा व स्वादिष्ट होता है. तरबूज का पेड़ नहीं होता बल्कि इसकी बहुत लम्बी बेल होती है. इस फल में अनेक गुण पाए जाते हैं तरबूज के बीज पैर में टखनों की सूजन में बहुत उपयोगी होते हैं। इसके लिए तरबूज के बीजों को छाया में सुखा लें। फिर इन बीजों को पीसकर उसमें से दो चम्‍मच बीजों ले लें। इन बीजों को एक कप उबलते पानी में डालकर भीगने दें। कुछ घंटों के बाद इसको छानकर पी जायें। इस पानी को दिन में चार बार कुछ दिन तक पीने से सूजन ठीक हो जाएगी।

 करेले का रस :- भारतीय होम्योपैथिक औषधावली में वर्णित मोमोर्डिका कैरण्टिया होम्योपैथिक औषधि करेले से बनी है। औषधीय रूप में हरा करेला ही लाभदायक है। पका हुआ सफेद पीले रंग का करेला लाभ नहीं करता। करेले को सुखाकर रखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते। करेला दो प्रकार का होता है – बड़ा करेला और छोटा करेला। बड़े करेला की अपेक्षा छोटा करेला अधिक गुणकारी होता है। कच्चा, हरा करेला अधिक गुणकारी होता है। पका हुआ करेला कम लाभ करता है। छोटा करेला भूख और पाचनशक्ति बढ़ाता है। करेले की सब्जी सूजन, ज्वर, दमा, चर्म रोग, यकृत और तिल्ली की वृद्धि में लाभदायक है करेले में विटामिन सर्वाधिक एवं बी1’, ‘बी2’, ‘सीऔर खनिज-कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहा, ताँबा, पोटेशियम पाया जाता हैं। स्‍वाद में कड़वा लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद करेला सूजन को दूर करने में भी बहुत मददगार होता है। इसके लिए करेले का रस चार चम्मच और मकोय का अर्क (एक तरह का सफेद फूल) पांच चम्मच लें। इन दोनों को मिलाकर रोज सुबह खाली पेट सेवन करें। अगर आपको मकोय नहीं मिल रहा है तो करेले के थोड़े-से रस में एक चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर पिएं।
धनिया की पत्तियां :- हमारी रसोईघर में प्रयोग होने वाले मसालों में से एक है धनिया ।धनिया हमारे खानें को स्वादिष्ट बनाने का काम करता है। धनिया खानें को स्वादिष्ट ही नही बनाता बल्कि इसमें कई औषधीय गुण भी पाये जाते है। धनिया के पत्ते खानें को ओर स्वादिष्ट बनाने और इसे सजाने के काम आता है। जब हम सब्जियों और दालों में धनिया का इस्तेमाल करते हैं तो यह देखने में ही बहुत सुंदर लगती है। धनिया में अनेक तरह के गुण होते हैं जो हमे कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं वो कुछ इस प्रकार से है आयरन से भरपूर होने के कारण धनिया की पत्तियां एनिमिया को दूर करने में तो मददगार होती ही है। साथ ही अपने एंटी टय़ुमेटिक और एंटीअर्थराइटिस के गुणों के कारण सूजन कम करने में बहुत मददगार होता है। इससे जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है

फायदेमंद है गुड :- गन्ने के रस से गुड और चीनी दोनों बनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं चीनी बनने पर आइरन तत्व, पोटेशियम, गंधक, फासफोरस और कैल्शियम आदि तत्व नष्ट हो जाते हैं लेकिन गुड़ में ये तत्व पूरी मात्रा में मौजूद होते हैं। गुड़ विटामिन ए और विटामिन बी का बेहतर स्त्रोत है।  गुड स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होने के साथ ही स्वादिष्ट भी होता है। यह सूजन को दूर करने में भी लाभदायक होता है। पुराने गुड़ को सोंठ के साथ मिलाकर खाने से शरीर की सूजन जाती रहती है। या फिर दो चम्मच सूखी हल्दी तवे पर भूनकर उसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर सेवन करें।

कुछ अन्ये तरीको से भी शरीर की सूजन को कम किया जा सकता है:-
1.कच्चे आलू पानी में उबालकर उस पानी से अंग विशेष पर सेंक लगाएं|
2.गरम पानी में दो-तीन शलजम के छोटे-छोटे टुकड़े डालकर थोड़ी देर तक रखा रहने दें| फिर उस पानी से प्रभावित अंग धोएं अथवा उबले पानी में जरासा शलजम का अर्क डालकर शरीर धोएं|
3.चार-पांच कालीमिर्च मक्खन के साथ खाने से सूजन उतर जाती है|
4.पानी में गेहूं उबालकर उस पानी से सूजन वाले स्थान पर कपड़े द्वारा सेंकाई करें|
5.एरण्ड के पत्तों पर गरम तेल (सरसों का) चुपड़कर सूजन वाले स्थान पर रखकर पट्टी बांध दें|
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